मकर संक्रांति

व्रत विधि
पौष या माघ महिना में बड़ी ” संक्रान्ति ” आती है । इस दिन गंगाजी नहाते हैं । काला तिल का लड्डू, दाल-चावल मिला कर और घेवर दान करो । एक घेवर पर दाना का लड्डू, आटा गुड़ का लड्डू और रुपिया रख कर, बाना निकाल कर सासुजी को पैर छूकर दो । अपनी बहन-बेटियाँ को भी इसी तरह बाना और संक्रान्ति का नेग का लड्डू-घेवर भेजो । संक्रान्ति का तीन-सौ-आठ नेग होता है, जिसमे से जो आपका मन हो, वो नेग करो । लड़की से ब्याह्वली साल ” घाट-पाट “, ” कोठी-मुट्ठी “, ” चिड़िया मुट्ठी “, का नेग कराते हैं । दूसरी साल इनका उजमन करा देते हैं । अगर ब्याह्वली साल की संक्रांति का भी उजमन कराते हो, तो लड्डू, घेवर, ओढ़ना, ब्लाउज और रुपिया पर बाना निकाल कर सासुजी को पैर छूकर दे दो ।
व्रत कथा
हिंदू धर्म में मीठे पकवानों के बगैर हर त्यौहार अधूरा सा है। मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ से बने लड्डू और अन्य मीठे पकवान बनाने की परंपरा है। तिल और गुड़ के सेवन से ठंड के मौसम में शरीर को गर्मी मिलती है और यह स्वास्थ के लिए लाभदायक है। ऐसी मान्यता है कि, मकर संक्रांति के मौके पर मीठे पकवानों को खाने और खिलाने से रिश्तों में आई कड़वाहट दूरी होती है और हर हम एक सकारात्मक ऊर्जा के साथ जीवन में आगे बढ़ते हैं। कहा यह भी...
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