शिवरात्री

व्रत विधि
महाशिवरात्रि की सुबह व्रती यानी व्रत करने वाला जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद माथे पर भस्म का त्रिपुंड तिलक लगाएं और गले में रुद्राक्ष की माला धारण करें। इसके बाद समीप स्थित किसी शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग की पूजा करें। इसके बाद व्रत करने का संकल्प लें।
महाशिवरात्रि व्रत का संकल्प
हाथ में जल, फूल, अक्षत, सुपारी और रुपया रखें। उसके बाद नीचे लिखा मंत्र बोलें
शिवरात्रिव्रतं ह्येतत् करिष्येहं महाफलम्।
निर्विघ्नमस्तु मे चात्र त्वत्प्रसादाज्जगत्पते।।
यह कहकर हाथ में फूल, चावल व जल लेकर उसे शिवलिंग पर अर्पित करते हुए नीचे लिखा श्लोक बोलें
देवदेव महादेव नीलकण्ठ नमोस्तु ते। कर्तुमिच्छाम्यहं देव शिवरात्रिव्रतं तव।। तव प्रसादाद्देवेश निर्विघ्नेन भवेदिति। कामाद्या: शत्रवो मां वै पीडां कुर्वन्तु नैव हि।।
महाशिवरात्रि व्रत का संकल्प
हाथ में जल, फूल, अक्षत, सुपारी और रुपया रखें। उसके बाद नीचे लिखा मंत्र बोलें
शिवरात्रिव्रतं ह्येतत् करिष्येहं महाफलम्।
निर्विघ्नमस्तु मे चात्र त्वत्प्रसादाज्जगत्पते।।
यह कहकर हाथ में फूल, चावल व जल लेकर उसे शिवलिंग पर अर्पित करते हुए नीचे लिखा श्लोक बोलें
देवदेव महादेव नीलकण्ठ नमोस्तु ते। कर्तुमिच्छाम्यहं देव शिवरात्रिव्रतं तव।। तव प्रसादाद्देवेश निर्विघ्नेन भवेदिति। कामाद्या: शत्रवो मां वै पीडां कुर्वन्तु नैव हि।।
व्रत कथा
किसी समय वाराणसी के जंगल में एक भील रहता था। उसका नाम गुरुद्रुह था। वह जंगली जानवरों का शिकार कर अपना परिवार पालता था। एक बार शिवरात्रि पर वह शिकार करने वन में गया। उस दिन उसे दिनभर कोई शिकार नहीं मिला और रात भी हो गई। तभी वो झील के किनारे पेड़ पर ये सोचकर चढ़ गया कि कोई भी जानवर पानी पीने आएगा तो शिकार कर लूंगा। वो पेड़ बिल्ववृक्ष था और उसके नीचे शिवलिंग स्थापित था। वहां एक हिरनी आई। शिकारी ने उसको मारने के लिए धनुष...
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