सांपदा के डोरे

व्रत विधि
चैत बदी एकम में सुबह ” संपदा का डोरा ” लेते हैं I होलिका दहन की अग्नि की लौ में दिखाई हुई कच्चे सूत से सांपदा माता का डोरा लेते हैं I सूत से सोलह तार का सोलह गाँठ का हल्दी से रंग के डोरी बनाते हैं I एक पाटा पर जल का लोटा रख कर रोली से साथिया कर के चावल चढ़ाते हैं I सोलह दाना नया जौ का हाथ में लेकर कहानी सुनते हैं I फिर डोरी गले में बाँध लेते हैं I जौ का दान उठा कर रख देते हैं I खोलते हैं I तब इसी दाना से अरग देते हैं I
व्रत कथा
एक समय की बात है। राजा नल अपनी पत्नी दमयंती के साथ बड़े प्रेम से राज्य करता था। होली के अगले दिन एक ब्राह्मणी रानी के पास आई। उसने गले में पीला डोरा बाँधा था। रानी ने उससे डोरे के बारे में पूछा तो वह बोली- 'डोरा पहनने से सुख-संपत्ति, अन्न-धन घर में आता है।' रानी ने भी उससे डोरा माँगा। उसने रानी को विधिवत डोरा देकर कथा कही।रानी के गले में डोरा बँधा देख राजा नल ने उसके बारे में पूछा। रानी ने सारी बात बता दी। राजा बोले-...
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