Skip to content

गणगौर

गणगौर

व्रत विधि

होली के दूसरे दिन से चैत सुदी तीज तक कुँवारी और ब्यावली साल की लडकियां ” गनगोर ” पूजती हैं I इस दिन सुबह आठ पीन्डिया होली की राख का और आठ पीन्डिया गोबर का बना के, छोटी टोकरी में दूब बिछा कर रखा जाता है I लडकियां सुबह बाहर से एक लोटा में जल, दूब, फूल लेकर “ दुबल्या का गीत ” गाती हुई आती हैI

इसके बाद जमीन पर गोबर माटी का चोका देकर पीन्डिया की टोकरी रखो I दीवाल या गत्ता पर एक काजल की और एक रोली की टिक्की दो I पीन्डिया पर जल का छींटा दो I गोबर के पीन्डिया पर रोली की और राख के पीन्डिया पर काजल की टिक्की दो I फूल चढ़ाओ I “सबेर का गीत” गाओ I एक छन्नी में थोड़ा सा जल, एक कौड़ी, एक सुपारी, एक छल्ला और एक पैसा रख कर दूब से सोलह छांटा दो I “एल-खैल” का गीत गाते हुए जल की छन्नी उलट दो I कौड़ी – छल्ला वगैरह पीन्डिया के लगा कर अपने आँख में लगा लो I फिर पीन्डिया को लेकर खड़े हो जाओ I बासेड़ा तक ऐसे ही पूजा करो I बासेड़ा के दिन गनगोर लाओ या फिर बनाओ I एक कुंडा में गनगोर या गनगोर की माटी के लिए और एक झुंवारा ऊगाने की खातिर कुंडा कुम्हार के यहाँ से “माटी ल्यान का गीत” गाते हुए लाओ I गनगोर को सजाकर कुंडा में दूब बिछा कर रखो I दूसरे कुंडा में झुंवारा (माटी में गेहूं डालकर) उगाओ I दिन में बाहर से “ पानी प्यान का गीत ” गाते हुए पानी लाओ I गनगोर को प्रसाद लगाकर पानी पिलाओ I शाम को “धुप का गीत” गाते हुए धुप करो I “रात का गीत” गाओ I दूसरे दिन सुबह पीन्डिया और गनगोर की पूजा करो I पीन्डिया की रोज की तरह ही पूजा करो I गनगोर को दूब का दातन कराओ, जल चढ़ाओ, टीका लगाओ, काजल लगाओ, फूल-माला चढ़ाओ I फिर “सबेर का गीत” के साथ “झुंवारा” का भी गीत गाओ I छन्नी के जल से पहले तो “आरती” करो, फिर छांटा घाल कर “एल-खैल” का गीत गाते हुए छन्नी उलट दो I उस जल से ओढ़ना में मोती पाड़ो (दूब को जल में डूबोकर अपने ओढ़ना पे बूंदे गिराओ) I “गनगोर की कहानी” पढ़ो I फिर मोती सारे गनगोर पर चढ़ा दो I “सीठना” गाते हुए गनगोर – पीन्डिया को लेकर खड़े हो जाओ I दूज तक ऐसे ही पूजा करो I बीच में कोई भी रविवार को “सूरज रोटा” का व्रत करो और गनगोर आने के बाद अच्छा दिन देखकर “गोरबिन्दोरा” करो I तीज को घर की सारी औरतें भी गनगोर की पूजा करते हैं I अगर घर में लड़कियाँ पूज रही हैं तो उनके साथ नहीं तो बाहर से मंगा कर पूजा करो I जमीन पर गोबर – माटी का चोका देकर, दूब – झुंवारा बिछाकर, गनगोर को कुंडा में से निकालकर बैठा दो I सीरा से जिमाओ I दक्षिणा चढ़ाओ I गेहूं की कुड्डी पर दिया जलाओ I धुप करो I दिवाल पर या गत्ता पर सोलह मेहँदी, सोलह काजल, और सोलह रोली की टिक्कियां दो I फिर गीत गाओ I आरती करने के बाद दूब – झुंवारा मिलाकर सोलह – सोलह छींटा दो I फिर “सीठना” के बाद “बधावा” और गाओ I सीरा – पूड़ी पर बाना निकालकर सासुजी को पैर छूकर दे दो I बहन -बेटियाँ का भी बाना निकालकर सीरा – रुपिया भेजो I दिन में गनगोर को पानी पिलाकर विदा करो I “विदा का गीत” गाते हुए गनगोर और दायजा ( रोज की पूजा की हुई और बची हुई दूब ) गंगाजी, नदी या कूंवा में विसर्जन कर दो I फिर “बधावा” गाते हुए वापस आ जाओ I

विवाह के बाद गनगोर का उजमन (पीहर)
लड़की तीज के दिन गनगोर पूजा करती है I तब आठ मीठी और आठ फीकी माठी गनगोर को चढ़ाती है I सोलह जगह आठ – आठ मीठी – फीकी माठी पर कपड़ा और रुपिया रख कर, हाथ फेर कर सासुजी को पैर छूकर देती हैं I आठ मीठी और आठ फीकी सुहाली जंवाई के लिए भी भेजते हैं I आठ मीठी और फीकी माठी लड़की खाती है I आठ मीठी और आठ फीकी माठी भाई के लिए बनाते हैं जिसमे स पहले भाई को खिला कर, सब कोई खा लेते हैं I

गनगोर का उजमन (ससुराल)
बहू कभी भी गनगोर का उजमन करती है I तीज के दिन गनगोर की पूजा कर के जब बाना निकालो, तब एक थाली में सोलह जगह चार – चार पूड़ी और सीरा और सुहाग पिटारी सासुजी की और सोलह ब्राह्मणियों की बनाओ I सासुजी के सामान में रुपिया, कपड़ा और नथ भी रहेगा I फिर सासुजी को पैर छूकर दे दो I फिर सोलह ब्राह्मणियों को भोजन खिलाओं और बाना निकाला हुआ सीरा – पूड़ी भी परोसो I भोजन कराने के बाद सभी के टीका काढ़ कर सोलह सुहाग पिटारी जिनमे हाथ फेरा हुआ है दे दो I दक्षिणा भी दो I

हर एक सुहाग पिटारी की सामग्री
मेहँदी, रोली, काजल, मैण, हींगलू, दर्पण, कंघा, चूड़ा, नाल, रुपिया, नथ, पोली, पायल, साड़ी ब्लाउज I

व्रत कथा

गणगौर पूजते समय का गीत गोर रे, गणगौर माता खोल ये , किवाड़ी बाहर उबी थारी पूजन वाली, पूजो ये, पुजारन माता कायर मांगू अन्न मांगू धन मांगू , लाज मांगू लक्ष्मी मांगू राई सी भोजाई मांगू | कान कुवर सो, बीरो मांगू इतनो परिवार मांगू.. सोलह बार पूजन का गीत – गौर-गौर गणपति ईसर पूजे, पार्वती पार्वती का आला टीला, गोर का सोना का टिका| टिका दे, टमका दे, राजा रानी बरत करे| करता करता, आस आयो मास आयो, खेरे खांडे लाडू लायो, लाडू ले बीरा ने दियो, बीरों...

पूरी कथा हमारे ऐप में पढ़ें

Read the full katha in Hindi and Marwadi, or listen to it as audio, in our free Android app. It also works without internet.

Get it on Google Play

← All vrat katha

Advertisement Advertisement