बासौड़ा

व्रत विधि
चैत बदी में होली के 6 – 7 दिन के अंदर सोमवार, बुधवार या शुक्रवार को “बासेड़ा” करते हैं I जिस दिन होलिका जलती है उस दिन का बासेड़ा नहीं करते है I
बासेड़ा के पहले दिन, दिन में खांटा (बाजरा के आटा में दही मिलाते हैं) डालते हैं I खांटा डालने के बाद बासेड़ा के दिन रात तक सूई हाथ में नहीं लेते हैं और झाड़ू नहीं लगाते हैं I कुंडारा भरने के ले लिए एक बड़ा कुंडा ( मिट्टी का बाउल जैसा ) , दस छोटी कुंडारी (मिट्टी का दीया), एक टूट्टी की करी (हांड़ी), एक राबड़ी के लिए हांडी मंगाकर, शाम को पानी में भिगो दो I दूसरे दिन ठंडा खाने के लिए रसोई में राबड़ी, बाजरा की रोटी, मीठा भात, गुलगुला और जो मन हो वो बना लो I मोठ – बाजरा भिगो दो I रसोई बन जाने के बाद रसोई घर में दिवाल पर घी का थापा देकर, सामने दीया जलाओ I जल, रोली और चावल से पूजा करो I मूंग चावल का आखां डालो I ” दो शीतला माता का, एक हनुमान जी का और एक भैरूजी ” का गीत गाओ I मेहँदी लगा लो I
बासेड़ा के दिन सुबह नहा कर अगर कुंडारा भरते हो, तो हर एक छोटी कुंडारियों ( मिट्टी के दीये ) में भिगोया हुआ मोठ – बाजरा, राबड़ी, दही, मीठा भात, गुलगुला भरकर, होली की झल दिखाया हुआ सूत से लपेट कर, पीसी हुई हल्दी से साथिया करके रखो I उसके बाद इन कुंडारियों को उस बड़े कुंडे में रख दो I उसके बाद घर के सभी लोग कुंडारा की पूजा करते हैं I करी में जल और घी या मक्खन डालकर, कुंडारा और पूजा का सामान लेकर “शीतला माता का गीत” गाते हुए शीतला माता के मंदिर जाते हैं I पूजा के सामान के लिए एक थाली में – राबड़ी, रोटी, भात, दही, चीनी, मूंग की दाल, बाजरा की मोई (बाजरा के आटा में घी और पीसी चीनी मिलाओ), बड़कुल्ला की जेल (माला), भिगोया हुआ मोठ – बाजरा, हल्दी में रंग के टुकड़ी (सूखे नारियल के टुकड़े), जल, रोली, मोली, चावल, दीया, धूपबत्ती और दक्षिणा डालकर शीतला माता के मंदिर जाओ और सब कोई हाथ लगाकर शीतला माता को चढ़ाओ I जो हल्दी की गाँठ होलिका दहन की अग्नि को दिखाया था, उसे पीस कर माता को चढ़ाओ I शीतला माता की पूजा कर के “कहानी ” सुनो I कहानी नीचे लिखी है I शीतला माता को जल का कलसा (लुटिया) चढ़ाओ I पूजा किया हुआ जल सब आँख में लगाओ I शीतला माता को बड़कुल्ला की जेल भी चढ़ाओ और धोक खा लो I फिर माटी में जो दूब लगायी है, उसे साथ में लेकर, “बधावा” गाते हुए घर वापस आ जाओ I
घर आकर मोठ – बाजरा – रुपिया पर बाना निकालकर सासुजी को पैर छूकर दे दो I बहन – बेटियों का भी बाना निकालकर भेजो I अगर हो पाय तो एक बूढ़ी मिसरानी और एक कुँवारी लड़की को ठंडा खिलाकर, सब कोई ठंडा खाओ I दूब पैंडा पर रख दो I जब आपके लड़का होए या फिर लड़के की शादी होए तो उस साल ऊजमन करो I
बासेड़ा का उजमन
जब आपके लड़का होए या फिर लड़के की शादी होए तो उस साल ऊजमन करते हैं I जितना कुंडारा हर साल भरते हैं, उसका दोगुना ऊजमन में भरते हैं I फिर उस कुंडारे के ऊपर साड़ी – ब्लाउज और रूपए रखकर सासुजी को पैर छूकर दे देते हैं I
बासेड़ा के पहले दिन, दिन में खांटा (बाजरा के आटा में दही मिलाते हैं) डालते हैं I खांटा डालने के बाद बासेड़ा के दिन रात तक सूई हाथ में नहीं लेते हैं और झाड़ू नहीं लगाते हैं I कुंडारा भरने के ले लिए एक बड़ा कुंडा ( मिट्टी का बाउल जैसा ) , दस छोटी कुंडारी (मिट्टी का दीया), एक टूट्टी की करी (हांड़ी), एक राबड़ी के लिए हांडी मंगाकर, शाम को पानी में भिगो दो I दूसरे दिन ठंडा खाने के लिए रसोई में राबड़ी, बाजरा की रोटी, मीठा भात, गुलगुला और जो मन हो वो बना लो I मोठ – बाजरा भिगो दो I रसोई बन जाने के बाद रसोई घर में दिवाल पर घी का थापा देकर, सामने दीया जलाओ I जल, रोली और चावल से पूजा करो I मूंग चावल का आखां डालो I ” दो शीतला माता का, एक हनुमान जी का और एक भैरूजी ” का गीत गाओ I मेहँदी लगा लो I
बासेड़ा के दिन सुबह नहा कर अगर कुंडारा भरते हो, तो हर एक छोटी कुंडारियों ( मिट्टी के दीये ) में भिगोया हुआ मोठ – बाजरा, राबड़ी, दही, मीठा भात, गुलगुला भरकर, होली की झल दिखाया हुआ सूत से लपेट कर, पीसी हुई हल्दी से साथिया करके रखो I उसके बाद इन कुंडारियों को उस बड़े कुंडे में रख दो I उसके बाद घर के सभी लोग कुंडारा की पूजा करते हैं I करी में जल और घी या मक्खन डालकर, कुंडारा और पूजा का सामान लेकर “शीतला माता का गीत” गाते हुए शीतला माता के मंदिर जाते हैं I पूजा के सामान के लिए एक थाली में – राबड़ी, रोटी, भात, दही, चीनी, मूंग की दाल, बाजरा की मोई (बाजरा के आटा में घी और पीसी चीनी मिलाओ), बड़कुल्ला की जेल (माला), भिगोया हुआ मोठ – बाजरा, हल्दी में रंग के टुकड़ी (सूखे नारियल के टुकड़े), जल, रोली, मोली, चावल, दीया, धूपबत्ती और दक्षिणा डालकर शीतला माता के मंदिर जाओ और सब कोई हाथ लगाकर शीतला माता को चढ़ाओ I जो हल्दी की गाँठ होलिका दहन की अग्नि को दिखाया था, उसे पीस कर माता को चढ़ाओ I शीतला माता की पूजा कर के “कहानी ” सुनो I कहानी नीचे लिखी है I शीतला माता को जल का कलसा (लुटिया) चढ़ाओ I पूजा किया हुआ जल सब आँख में लगाओ I शीतला माता को बड़कुल्ला की जेल भी चढ़ाओ और धोक खा लो I फिर माटी में जो दूब लगायी है, उसे साथ में लेकर, “बधावा” गाते हुए घर वापस आ जाओ I
घर आकर मोठ – बाजरा – रुपिया पर बाना निकालकर सासुजी को पैर छूकर दे दो I बहन – बेटियों का भी बाना निकालकर भेजो I अगर हो पाय तो एक बूढ़ी मिसरानी और एक कुँवारी लड़की को ठंडा खिलाकर, सब कोई ठंडा खाओ I दूब पैंडा पर रख दो I जब आपके लड़का होए या फिर लड़के की शादी होए तो उस साल ऊजमन करो I
बासेड़ा का उजमन
जब आपके लड़का होए या फिर लड़के की शादी होए तो उस साल ऊजमन करते हैं I जितना कुंडारा हर साल भरते हैं, उसका दोगुना ऊजमन में भरते हैं I फिर उस कुंडारे के ऊपर साड़ी – ब्लाउज और रूपए रखकर सासुजी को पैर छूकर दे देते हैं I
व्रत कथा
बहुत प्राचीन समय की बात है। भारत के किसी गांव में एक बुढ़िया माई रहती थी। वह हर शीतलाष्टमी के दिन शीतला माता को ठंडे पकवानों का भोग लगाती थी। भोग लगाने के बाद ही वह प्रसाद ग्रहण करती थी। गांव में और कोई व्यक्ति शीतला माता का पूजन नहीं करता था। एक दिन गांव में आग लग गई। काफी देर बाद जब आग शांत हुई तो लोगों ने देखा, सबके घर जल गए लेकिन बुढ़िया माई का घर सुरक्षित है। यह देखकर सब लोग उसके घर गए और पूछने...
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