बड़सांयत अमावस

व्रत विधि
जेठ की अमावस को ” बड़सांयत अमावस ” होती है । इस दिन बड़ के पेड़ की जल, मोली, रोली, चावल, गुड़, भीगा चना, फूल से पूजा करो । दक्षिणा चढ़ाओ और धूप दीप करो । मोली में कच्चा सूत मिला कर बड़ के लपेटो । फेरी दो । बड़ के पत्तों का गहना बना कर पहनो । कहानी सुनो । भिगोया हुआ चना और रुपिया पर बाना निकालकर सासुजी को पैर छूकर दे दो । अपनी बहन बेटियाँ का भी बाना निकालो ।
व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, अश्वपति नाम का एक राजा था। राजा के घर कन्या के रूप में सावित्री का जन्म हुआ। जब वह विवाह योग्य हुई तो राजा ने अपने मंत्री के साथ सावित्री को अपना पति चुनने के लिए भेज दिया। सावित्री ने अपने मन के अनुकूल वर सत्यवान को चुन लिया। सत्यवान महाराज द्युमत्सेन का पुत्र थे जिनका राज्य हर लिया गया था और वो अंधे हो गए थे।वो अपनी पत्नी सहित वनों में रहते थे। वहीं जब सावित्री विवाह करके लौटीं तो नारद जी ने अश्वपति को...
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