गुरु पूर्णिमा

व्रत विधि
इस दिन का हिन्दू धर्म मे बहुत महत्त्व है। इस जल्दी उठकर स्नान करने के बाद व्यास जी की मूर्ति को फूल या माला चढ़ाकर अपने गुरु के पास जाना चाहिए और उन्हें आसान पर बैठाकर पुष्प माला पहननी चाहिए और चरण सपर्श कर अपने गुरु का आशीर्वाद लेना चाहिए। अगर आपके गुरु आपके आसपास नहीं तो उनकी फोटो के आगे सर झुका के नमन करना चाहिए ,अपने गुरु का आशीर्वाद ले और किसी रूप मैं उनकी सेवा करे।
व्रत कथा
आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं। आज से कई हज़ार वर्षों पूर्व इस दिन वेद व्यास जी अवतरित हुए थे। इसलिए उनके शिष्यों ने अपने गुरु के जन्म दिन के महान दिवस को ही गुरु की पूजा के लिए चुना। यही कारण है कि गुरु पूजा दिवस को “व्यास पूर्णिमा” भी कहा जाता है। आज हजारों वर्षों बाद भी गुरु पूजा की परम्परा प्रतिष्ठित है क्योंकि गुरु वही है और उसके द्वारा प्रदान किया ज्ञान भी वही है। महत्व व्यस पूर्णिमा इसिलए कहा जाता है क्योकि इस...
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