तीज

व्रत विधि
भादव सुदी तीज को ” हड़ताल तीज ” का व्रत होता है । इस दिन निघोट व्रत करते हैं – पानी भी नहीं पीते हैं I शाम को नहाकर, नया वस्त्र पहन कर, पूजा करते हैं । पहले गणेशजी, नवग्रह, कलश और षोड़श मातृका की पूजा करो । इसके बाद गंगाजी की माटी से शिवजी-पार्वतीजी बनाकर, जल, पंचामृत, रोली, मोली, चन्दन, चावल, सिंदूर, फूल, बेलपत्र से पूजा करो । प्रसाद और दक्षिणा चढ़ाओ । धुप-दीप करो । एक धोती-गमछा और एक सुहाग पिटारी चढ़ाओ । सुहाग पिटारी में सुहाग की सब चीज और तेरह मिठाई डालो । फिर आरती करो और कथा सुनो । एक और सुहाग पिटारी, मिठाई और रुपिया पर बाना निकाल कर सासुजी को पैर छूकर दे दो । धोती-गमछा ब्राह्मण को दे दो । दूसरे दिन सुबह शिवजी-पार्वतीजी का विसर्जन करो । एक ब्राह्मण जोड़ी को भोजन कराओ , ब्राह्मणी को चढ़ाई हुई सुहाग पिटारी और दक्षिणा दो । फिर खुद भी भोजन कर लो । ये व्रत बीस साल तक करके पण्डितों से पूछकर कर उद्यापन कर दो ।
व्रत कथा
एक बार भगवान शिव ने पार्वतीजी को उनके पूर्व जन्म का स्मरण कराने के उद्देश्य से इस व्रत के माहात्म्य की कथा कही थी। श्री भोलेशंकर बोले- हे गौरी! पर्वतराज हिमालय पर स्थित गंगा के तट पर तुमने अपनी बाल्यावस्था में बारह वर्षों तक अधोमुखी होकर घोर तप किया था। इतनी अवधि तुमने अन्न न खाकर पेड़ों के सूखे पत्ते चबा कर व्यतीत किए। माघ की विक्राल शीतलता में तुमने निरंतर जल में प्रवेश करके तप किया। वैशाख की जला देने वाली गर्मी में तुमने पंचाग्नि से शरीर को तपाया।...
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