Skip to content

ऋषि पंचमी

ऋषि पंचमी

व्रत विधि

भादव सुदी पंचमी को ” ऋषि पंचमी ” का व्रत होता है । इस दिन सुबह गंगाजी की मिट्टी में गोबर, तुलसी के पेड़ की मिट्टी, पीपल के पेड़ की मिट्टी, गोपी चन्दन, तिल, आंवला, गंगाजल, गऊमूत्र मिला कर 108 बार हाथ धो । 108 ऊँग का दातन करो, 108 कुल्ला करो, 108 पत्ता ऊँग का सिर पर रखकर 108 बार लोटे से नहाओ । गंगाजी या घर पर नहाओ । फिर नया कपड़ा पहन कर पूजा करने बैठो । पहले गणेशजी, कलश, नव ग्रह, षोड़श मातृका की पूजा करो I इसके बाद सप्त ऋषि और अरुन्धती की पूजा करो । एक पाटा पर ऊन और कुशा मिलाकर सात ऋषि और अरुन्धती बना कर रखो । उनकी जल, मोली, रोली, पंचामृत, चन्दन, चावल, फूल, प्रसाद, फल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची से पूजा करो । दक्षिणा चढ़ाओ । फिर कहानी सुन कर आरती करो । चार केला, घी, चीनी, रुपिया से बाना निकालकर ब्राह्मण को दे दो । एक समय खाना खाओ । अनाज, नमक, चीनी, दूध, दही, हल से जोती चीज नही खाते हैं ।

व्रत कथा

विदर्भ देश में उत्तंक नामक एक सदाचारी ब्राह्मण रहता था। उसकी पत्नी बड़ी पतिव्रता थी, जिसका नाम सुशीला था। उस ब्राह्मण के एक पुत्र तथा एक पुत्री दो संतान थी। विवाह योग्य होने पर उसने समान कुलशील वर के साथ कन्या का विवाह कर दिया। दैवयोग से कुछ दिनों बाद वह विधवा हो गई। दुखी ब्राह्मण दम्पति कन्या सहित गंगा तट पर कुटिया बनाकर रहने लगे। एक दिन ब्राह्मण कन्या सो रही थी कि उसका शरीर कीड़ों से भर गया। कन्या ने सारी बात मां से कही। मां ने पति...

पूरी कथा हमारे ऐप में पढ़ें

Read the full katha, or listen to it as audio, in our free Android app. It also works without internet.

Get it on Google Play

← All vrat katha

Advertisement Advertisement