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आशा भगोती

आशा भगोती

व्रत विधि

आस्योज बदी की अष्टमी से ” आशा भगोती ” की पूजा शुरू करो । एक पाटा पर आठ कुणा का गोबर माटी का चोका दो I फिर आँठू कुणा पर और बीच में आठ-आठ रोली, मेहँदी और काजल की टिक्की दो । फिर नौ जगह आठ गेहूँ का दाना, आठ दूब, आठ चिटकी, आठ पैसे, एक सुहाली बिना नमक की, एक फल चढ़ाओ और नौ जगह एक दिया जलाओ । आठ गेहूँ का दाना लेकर आशा भगोती की कहानी सुनो ।
इस तरह आस्योज सुदी एकम तक पूजा करो । इस दिन ( एकम ) पूजा तो रोज की तरह ही करो, सिर्फ सुहाली नौ कुणा पर चार मीठी और चार बिना नमक की सुहाली का बाना निकालकर सासुजी को पैर छूकर कर दे दो । खाना में एक बार चार मीठी, चार बिना नमक की सुहाली और दूध फल खाओ । इस तरह आठ साल तक आशा भगोती का व्रत करो । नौवे साल में उजमन कर दो ।

आशा भागोती को उजमन
अगर उजमन करो तब अमावस्या तक तो उसी तरह पूजा करो । एकम के दिन पूजा कर के आठ सुहाग पिटारी तो ब्राह्मणियों को और एक सासुजी को चढ़ाओ । सुहाग पिटारी जैसी मंगला गौरी की करते हो उसी तरह करो, सिर्फ चार मीठी और चार बिना नमक की सुहाली और रखो । आठ सुहागन ब्राह्मणियों को जिमाओ । फिर एक-एक सुहाग पिटारी और दक्षिणा पैर छूकर दे दो । सासुजी की सुहाग पिटारी और रुपिया उनके पैर छूकर कर दे दो । व्रत हर साल की तरह ही करो ।

व्रत कथा

प्राचीन समय में हिमाचल में एक राजा रहता था। उसकी दो पुत्रियां थी। एक का नाम गौरा और दूसरी का नाम पार्वती था। एक दिन राजा ने अपनी दोनों लड़कियों को बुलाकर पूछा कि तुम किसके भाग का खाती हो? तब पार्वती जी बोलीं कि मैं तो अपने भाग का खाती हूं। गौरा से पूछने पर उन्होंने बताया कि मैं तो तुम्हारे भाग का खाती हूं। राजा ने ब्राह्मण को बुलाकर कहा कि पार्वती के लिए भिखारी का वर ढूंढना और गौरा के लिए राजकुमार वर ढूंढना। ब्राह्मण ने गौरा...

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