Skip to content

दिवाली

दिवाली

व्रत विधि

कार्तिक की अमावस को ” दिवाली ” होती है । इस दिन सुबह हनुमानजी, पीतरजी के धोक लो । जल, रोली, मोली, चावल, फूल, मिठाई, अबीर-गुलाल, दक्षिणा चढ़ाओ । नारियल पधार कर चढ़ाओ । धुप-दीप करो । आपका मन हो ती लक्ष्मीजी का व्रत कर लो । दशहरा में जो बही-बसना बनने दिया था, उसे भी मंगा लो । घर में सब कोई पैसे के हाथ लगाकर, वही पैसे को तेल में डालकर भैरूंजी को या फिर चोराहे पर चढ़ा दो । शाम को दाल का सीरा, पूड़ी, बड़ा, कैरिया, फली, पापड़ और आपका जो मन हो वो रसोई बनाओ । ग्यारह पूड़ी और सब तरह की थोड़ी-थोड़ी चीजें देवी-देवता के नाम की निकाल कर ब्राह्मण को दे दो । ब्राह्मण को भोजन कराओ । शाम को खाने के पहले घर की कोई स्त्री जिसने व्रत रखा है वह सूरज की साख में ( दिन छिपने के समय ) गणेश – लक्ष्मीजी के आगे दीया जलाती हैं । सब रसोई का भगवान को भोग लगाकर छूता निकाल देते हैं I फिर घर के सभी लोग जीम लेते हैं I फिर सब लोग तैयार होकर गणेश – लक्ष्मीजी की पूजा करते हैं I दिवाल पर बने गणेश – लक्ष्मीजी के सामने पाटा पर लाल कपड़ा बिछा कर बाजार से लाए हुए गणेशजी-लक्ष्मीजी या फिर चाँदी / पीतल के गणेश – लक्ष्मीजी को बैठाते हैं I एक थाली में 21 दीया सजाकर रख लेते हैं और उसमे बाती डालकर जला देते हैं । जल, रोली, मोली, चावल, फूल, फल, मीठा, गुड़, दूब, खड़ा धनिया, पान, लौंग, इलायची, अबीर-गुलाल, दक्षिणा चढ़ाते हैं । 4 पूड़ी और सीरा भी चढ़ा देते हैं । मूंग-चावल का आखां डालो । फिर एक थाली में एक दीया जलाकर आरती कर लेते हैं I फिर टीका काढ़ कर धोक खा लेते हैं I घर के सभी बड़ों का पैर छूतें हैं I अपनी बहूओं को रुपिया दो । बहूवें भी सासुजी को पैर छूकर रुपिया दती हैं। फिर थाली में से सभी दीयों को पूरे घर में सजा देते हैं I बीच वाला एक दीये को थाली में ही छोड़ देते हैं I इस दीये को रात भर जलते रहने देते हैं I इसी दीये के ऊपर एक और दीया रखकर उसमे काजल बना लेते हैं I अगले दिन गणेश – लक्ष्मीजी की पूजा करके घर की सभी औरतें लक्ष्मीजी की कहानी सुनती हैं I फिर घर के सभी लोग की आँख में काजल लगाया जाता है I दक्षिणा में चढ़ाय रूपए को तिजोरी में रख दो । गणेशजी- लक्ष्मीजी की मूर्ति ( चाँदी / पीतल ) वाली अपने मंदिर में उठा कर रख लो । अगर मिट्टी के गणेश – लक्ष्मीजी हैं तो उन्हें भी रख लेते हैं और अगले साल दिवाली के अगले दिन अन्य सामानों के साथ विसर्जन कर देते हैं I

व्रत कथा

लक्ष्मीजी की कहानी एक गांव में एक साहूकार था, उसकी बेटी प्रतिदिन पीपल पर जल चढ़ाने जाती थी। जिस पीपल के पेड़ पर वह जल चढ़ाती थी, उस पेड़ पर लक्ष्मी जी का वास था। एक दिन लक्ष्मी जी ने साहूकार की बेटी से कहा ‘मैं तुम्हारी मित्र बनना चाहती हूँ’। लड़की ने कहा की ‘मैं अपने पिता से पूछ कर आऊंगी’। यह बात उसने अपने पिता को बताई, तो पिता ने ‘हां’ कर दी। दूसरे दिन से साहूकार की बेटी ने सहेली बनना स्वीकार कर लिया। दोनों अच्छे मित्रों...

पूरी कथा हमारे ऐप में पढ़ें

Read the full katha in Hindi and Marwadi, or listen to it as audio, in our free Android app. It also works without internet.

Get it on Google Play

← All vrat katha

Advertisement Advertisement