गोबरधन

व्रत विधि
कार्तिक में दिवाली के दूसरे दिन सुबह ” गोबरधन ” की पूजा करते हैं । इस दिन गोबरधन बना कर, जल, दही, मोली, रोली, चावल, फूल, तेल में भिगोकर रूई, मूंग की दाल, चार बताशा, चार गुड़ की सुहाली, सफेद कपड़ा और दक्षिणा चढ़ा दो । गोबरधन के सिर पर झेरना रखो । फेरी दो । फिर पूजा का चढ़ावा ब्राह्मणी को दे दो । झेरना वापस रख लो ।
व्रत कथा
गोबरधन गीत नन्द महर घर सुरही सी गाय , कजंली बन चरबा गई ओ राम । एक बन चरति सकल बन चर , कजली बन सारो चर्यो ओ राम । चरती-चरती माता होई ए तिसाई , नारियो क धरा ए बधावणा ओ राम । तन ए गावतरी माता जाण न द्यो , कजली बन सारो चर्यो ओ राम । एक बर तो नार बीरा घर न जाऊं , घरां ए उड़ी क बालक बाछड़ा ओ राम । झूठी ए गवतरी माता झूठ न बोल , घरां ए गई क्यूँ बावड़...
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