देव उठनी ग्यारस

व्रत विधि
कार्तिक सुदी ग्यारस को ” देव उठनी ग्यारस ” आती है। इस दिन जमीन पर चून और गेरू से देव मांड कर, एक कठुवा रख दो । शाम को देव की जल, रोली, मोली, चावल, फूल, गुड़, ऊख, चार सुहाली, चार केला, सवा सेर चावल, गूंवार की फली, मूली, रूई, दक्षिणा चढ़ा कर पूजा करो । दीया जलाओ । गीत में भगवान बदले अपना नाम लो ।
व्रत कथा
देव उठाने का गीत उठो देवो बैठो देवो उठो देवो बैठो देवो, सोटकड़ी सटकाओ देवो । आल धरिया पांच पचेटा, ये बहू रुकमण थारा बेटा । आल धरिया हर्षाय झमीर, ये बहू यशोधरा थारा वीर । जितनी खूटियां टांगुनी सूत, जितना अंबर जगमा पूत । जितनी अबरी सोक मलाई, जितना अटर भंवर आई । जितनी अंधर सींक सलाई, जितनी अंधर भैंवड़ आई । जितनी अंधर ठिकरियां, जितनी अंधर डिकरियां । जितना अंधर ईटा रोड़ा, जितना अंधर हाथी घोड़ा । तू तो उड़र म्हारा तू तो उड़र म्हारा हरिये बनका सुबटा...
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